आज हरी आये, विदुर घर पावना॥ आज हरी आये, विदुर घर पावना॥ | 1000+ مجموعة أفضل موسيقى الوقت

by jack ck

आज हरी आये, विदुर घर पावना॥
आज हरी आये, विदुर घर पावना॥
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आज हरी आये, विदुर घर पावना॥

आज हरी आये, विदुर घर पावना॥

विदुर नहीं घर मैं विदुरानी ,आवत देख सारंग प्राणी ।

फूली अंग समावे न चिंता ॥ ,भोजन कंहा जिमावना ॥

केला बहुत प्रेम से लायीं, गिरी गिरी सब देत गिराई ।

छिलका देत श्याम मुख मांही ॥,लगे बहुत सुहावना,

इतने में विदुरजी घर आये ,खरे खोटे वचन सुनाये ।

छिलका देत श्याम मुख मांही ॥,कँहा गवांई भावना,

केला लीन्ह विदुर हाथ मांही,गिरी देत गिरधर मुख मांही ।

कहे कृष्ण जी सुनो विदुर जी ॥,वो स्वाद नहीं आवना,

बासी कूसी रूखी सूखी,हम तो विदुर जी प्रेम के भूखे ।

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आज हरी आये, विदुर घर पावना॥

आज हरी आये, विदुर घर पावना॥

विदुर नहीं घर मैं विदुरानी ,आवत देख सारंग प्राणी ।

फूली अंग समावे न चिंता ॥ ,भोजन कंहा जिमावना ॥

केला बहुत प्रेम से लायीं, गिरी गिरी सब देत गिराई ।

छिलका देत श्याम मुख मांही ॥,लगे बहुत सुहावना,

इतने में विदुरजी घर आये ,खरे खोटे वचन सुनाये ।

छिलका देत श्याम मुख मांही ॥,कँहा गवांई भावना,

केला लीन्ह विदुर हाथ मांही,गिरी देत गिरधर मुख मांही ।

कहे कृष्ण जी सुनो विदुर जी ॥,वो स्वाद नहीं आवना,

बासी कूसी रूखी सूखी,हम तो विदुर जी प्रेम के भूखे ।

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